शिक्षा मंत्रालय की खास पहल: अब पढ़ाई से नौकरी तक काम आएगी अपार आईडी
आज के दौर में डिजिटल क्रांति ने हमारी शिक्षा व्यवस्था को भी पूरी तरह बदल दिया है। शिक्षा मंत्रालय की ओर से शुरू की गई 'वन नेशन-वन-स्टूडेंट आईडी' योजना देश भर के छात्रों के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो रही है। इस योजना के तहत छात्रों के लिए 12 अंकों की एक खास APAAR ID बनाई जा रही है। हाल ही में शिक्षा मंत्रालय ने अपार पोर्टल पर प्राइवेसी पॉलिसी को अपडेट किया है, जिसके बाद इसका दायरा सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं, बल्कि नौकरी की दुनिया तक फैल गया है।
अब छात्र जब भी स्कूल या कॉलेज की पढ़ाई पूरी करके किसी कंपनी में नौकरी के लिए आवेदन करेंगे, तो वहां के नियोक्ता इस आईडी के जरिए आसानी से उनकी योग्यता परख सकेंगे। दस्तावेजों की लंबी फाइलों को संभालने और उन्हें सत्यापित कराने के झंझट से छात्रों को पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी। सरकार का यह कदम शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने और फर्जी दस्तावेजों पर लगाम कसने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
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क्या है 12 अंकों की अपार आईडी और कैसे सुरक्षित रहता है पूरा डाटा
अपार आईडी असल में एक डिजिटल लॉकर की तरह काम करती है, जिसमें छात्र की कक्षा पहली से लेकर उच्च शिक्षा तक का पूरा कच्चा-चिट्ठा सुरक्षित रहता है। इसमें स्कूल के रिकॉर्ड से लेकर मार्कशीट, डिग्री और तमाम तरह के सर्टिफिकेट डिजिटल फॉर्म में सेव किए जाते हैं। इस आईडी को बनवाने के लिए छात्र के आधार कार्ड की जरूरत होती है, जिससे उसकी पहचान पूरी तरह पुख्ता होती है।
सरकार की इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश के हर छात्र का एक सिंगल डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट तैयार करना है। छात्र देश के किसी भी कोने में जाएं या किसी भी संस्थान में दाखिला लें, उनका पुराना शैक्षणिक इतिहास इस एक आईडी के जरिए पलक झपकते ही मिल जाएगा। इससे स्कूलों और विश्वविद्यालयों के चक्कर काटने की पुरानी और थकाऊ परंपरा से भी छात्रों को छुटकारा मिलेगा।
सीबीएसई ने स्कूलों को दिए निर्देश, ऐसे बनती है डिजिटल आईडी
छात्रों की इस महत्वपूर्ण आईडी को बनवाने की पूरी जिम्मेदारी संबंधित स्कूल प्रशासन की है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई ने देश के सभी संबद्ध स्कूलों को निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने यहां पढ़ने वाले पहली से ग्यारहवीं कक्षा के सभी बच्चों की अपार आईडी अनिवार्य रूप से तैयार करवाएं। इसके लिए स्कूलों को UDISE+ पोर्टल की मदद लेनी होती है।
प्रक्रिया बहुत ही आसान है, जिसमें छात्रों को अपने आधार कार्ड की फोटोकॉपी स्कूल में जमा करानी होती है, जिसके बाद स्कूल प्रबंधन पोर्टल पर सारी जानकारी दर्ज करके आईडी जनरेट करता है। अभिभावकों और छात्रों दोनों के लिए यह समझना जरूरी है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित है और इसमें छात्र की निजी जानकारियों की गोपनीयता का पूरा ध्यान रखा जाता है।
नौकरीपेशा युवाओं के लिए वरदान साबित होगी यह व्यवस्था
अक्सर देखा गया है कि कॉलेज या यूनिवर्सिटी की पढ़ाई पूरी होने के बाद जब युवा जॉब के लिए जाते हैं, तो कंपनियों द्वारा उनके दस्तावेजों का वेरिफिकेशन कराने में लंबा वक्त लगता है। कई बार मार्कशीट के खो जाने या कॉलेज के चक्कर काटने में छात्रों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। लेकिन अपार आईडी के आने से यह समस्या हमेशा के लिए खत्म होने जा रही है।
कंपनियां सीधे इस पोर्टल के माध्यम से उम्मीदवार की डिग्रियों की सच्चाई जांच सकेंगी। हालांकि, इसके लिए सुरक्षा का एक कड़ा पहरा भी रखा गया है। नियोक्ता सीधे तौर पर किसी भी छात्र का डाटा नहीं देख सकता है। जब तक छात्र अपनी मंजूरी नहीं देगा और उसके मोबाइल पर आए ओटीपी (OTP) को वेरीफाई नहीं करेगा, तब तक कोई भी कंपनी उसके शैक्षणिक रिकॉर्ड तक नहीं पहुंच सकती है।
"वन नेशन-वन-STUDENT आईडी योजना छात्रों के भविष्य को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। इससे न सिर्फ फर्जी डिग्रियों पर रोक लगेगी, बल्कि हमारे युवाओं को देश और दुनिया में बेहतर रोजगार के अवसर तलाशने में भी बहुत आसानी होगी।" — शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार
फर्जी दस्तावेजों और कागजी झंझटों से मिलेगी हमेशा के लिए मुक्ति
भारत जैसे विशाल देश में शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में फर्जीवाड़े की खबरें अक्सर सामने आती रहती हैं। कई लोग जाली मार्कशीट और डिग्रियां बनवाकर नौकरियों में सेंध लगा देते हैं, जिससे योग्य और मेहनतकश युवाओं का हक मारा जाता है। अपार आईडी इस प्रकार की तमाम गैर-कानूनी गतिविधियों पर लगाम लगाने का सबसे प्रभावी हथियार बनने जा रही है।
चूंकि सारा डेटा सरकार के अधिकृत डिजिटल पोर्टल पर सुरक्षित रहता है, इसलिए इसमें किसी भी तरह की छेड़छाड़ करना नामुमकिन है। आने वाले दिनों में यह आईडी छात्रों का सबसे बड़ा डिजिटल पहचान पत्र बन जाएगी, जो स्कूल के बस्ते से लेकर दफ्तर की मेज तक उनके हर कदम पर काम आएगी। शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने भी सरकार के इस कदम की भरपूर सराहना की है।



