रेलवे बोर्ड का बड़ा नीतिगत कदम, बदली गई सुरक्षा पुर्जों की जांच नीति
भारतीय रेलवे ने देश भर में ट्रेन यात्रा को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए एक बेहद अहम और दूरगामी फैसला लिया है। रेल हादसों की रोकथाम और ट्रेनों के सुगम परिचालन के लिए रेलवे बोर्ड ने अपनी नीति में बड़ा संशोधन किया है। सरकार की तरफ से हाल के वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में आउटसोर्सिंग को बढ़ावा दिया जा रहा था, लेकिन रेलवे ने इस चलन से ठीक उलट एक सख्त कदम उठाया है। बोर्ड ने ट्रेनों के ब्रेक, पहियों, स्प्रिंग और कपलिंग जैसे अति-संवेदनशील सुरक्षा पुर्जों की गुणवत्ता जांच का अधिकार निजी एजेंसियों से पूरी तरह वापस ले लिया है।
अब इन महत्वपूर्ण और जानलेवा साबित हो सकने वाले कल-पुर्जों की परख कोई निजी थर्ड-पार्टी एजेंसी नहीं, बल्कि भारतीय रेलवे की शीर्ष तकनीकी और अनुसंधान संस्था 'अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन' (RDSO) के विशेषज्ञ करेंगे। रेलवे का यह फैसला आम यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। पिछले कुछ समय से रेलवे बोर्ड को लगातार यह फीडबैक मिल रहा था कि सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार का समझौता भारी पड़ सकता है, जिसके बाद यह नीतिगत बदलाव किया गया है।
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क्यों पड़ी नीति बदलने की जरूरत? सामने आ रही थीं गंभीर तकनीकी खामियां
गौरतलब है कि रेलवे बोर्ड ने चार जनवरी 2023 को थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन नीति लागू की थी। इस नीति के तहत खरीद आदेश के मूल्य और मात्रा के आधार पर यह तय किया गया था कि कई उपकरणों की गुणवत्ता की जांच निजी एजेंसियों के माध्यम से कराई जा सकती है। इस नीति को लाने के पीछे मुख्य उद्देश्य निरीक्षण प्रक्रिया को तेज करना और आरडीएसओ पर काम के अत्यधिक बोझ को कम करना था। हालांकि, समय के साथ इस व्यवस्था के जमीनी परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं मिले और गंभीर चिंताएं सामने आने लगीं।
निजी एजेंसियों को सुरक्षा पुर्जों की जांच सौंपे जाने के बाद फील्ड स्तर पर कई तकनीकी खामियां देखने को मिलीं। कई मामलों में यह पाया गया कि निजी एजेंसियों द्वारा जांच के बाद पास किए गए कल-पुर्जों की गुणवत्ता उच्च स्तर की नहीं थी। जानकारों के अनुसार, जब ऐसे दोयम दर्जे के पुर्जे पटरियों पर दौड़ती गाड़ियों में इस्तेमाल किए जाते हैं, तो वे बड़े हादसों का कारण बन सकते हैं। रेलवे की आंतरिक समीक्षा में यह बात खुलकर सामने आई कि निजी निगरानी व्यवस्था में कई मोर्चों पर लापरवाही बरती जा रही थी, जिसे नजरअंदाज करना यात्रियों की जान से खेलने जैसा होता।
पटरियों पर मंडरा रहा था खतरा: हाट एक्सल और कपलर टूटने की घटनाएं
हाल के दिनों में मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों के संचालन के दौरान कई ऐसी घटनाएं सामने आईं जिन्होंने रेलवे के तकनीकी इंजीनियरों की नींद उड़ा दी थी। पटरियों पर दौड़ती गाड़ियों में हाट एक्सल यानी पहियों का अत्यधिक गर्म होकर जाम होना, वैगनों और डिब्बों के बीच से कपलर का अचानक टूट जाना, बोगी स्प्रिंग में गंभीर खराबी आना और ब्रेक बाइंडिंग जैसी समस्याएं बार-बार सामने आ रही थीं। इन तकनीकी गड़बड़ियों के कारण कई बार मालगाड़ियां और ट्रेनें बीच रास्ते में दुर्घटनाग्रस्त होने से बाल-बाल बचीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इन तकनीकी कमियों पर लगाम न लगाई जाती, तो यह किसी बड़े रेल हादसे का सबब बन सकती थीं। रेलवे की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठकों में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की गई कि सुरक्षा से जुड़े कल-पुर्जों के मामले में थर्ड पार्टी की लचर निगरानी किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जा सकती। यात्रियों की सुरक्षा और माल ढुलाई की संरक्षा पर किसी भी प्रकार का जोखिम उठाने से बचने के लिए रेलवे बोर्ड ने आखिरकार इस पुरानी व्यवस्था को पलटने का ऐतिहासिक फैसला किया।
आरडीएसओ के विशेषज्ञों की सीधी निगरानी से रुकेगी घटिया पुर्जों की आपूर्ति
रेलवे बोर्ड के उप निदेशक (रेलवे स्टोर्स) अजय कुमार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक, अब खरीद आदेश की संख्या या उसकी लागत चाहे जो भी हो, कुछ बेहद संवेदनशील उपकरणों की जांच अनिवार्य रूप से केवल आरडीएसओ द्वारा ही की जाएगी। इनमें मुख्य रूप से मालगाड़ी का एयर ब्रेक सिस्टम, पहियों के सीटीआरबी (कर्ट्रिज टेपर रोलर बेयरिंग) बेयरिंग, विभिन्न बोगी पार्ट्स और सीबीसी कपलर शामिल हैं। इन सभी उपकरणों को ट्रेन के संचालन का दिल माना जाता है, क्योंकि इन्हीं के भरोसे ट्रेन की रफ्तार और ठहराव तय होता है।
"यात्रियों और रेल संरक्षा से जुड़े उपकरणों की गुणवत्ता पर अब कोई समझौता नहीं होगा। नए नियमों के तहत अब हर संवेदनशील पुर्जे की जांच सीधे हमारे शीर्ष विशेषज्ञों की देखरेख में होगी, जिससे किसी भी स्तर पर लापरवाही की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।"— रेलवे बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी
रेलवे प्रशासन का मानना है कि सरकारी और अत्यधिक अनुभवी विशेषज्ञों की सीधी निगरानी होने से घटिया गुणवत्ता वाले पुर्जों की आपूर्ति पर पूरी तरह रोक लग जाएगी। बाजार में मुनाफा कमाने के चक्कर में मानक से कमतर सामग्रियां सप्लाई करने वाली कंपनियों पर अब शिकंजा कसा जा सकेगा। इस व्यवस्था से रेलवे के साजो-सामान की लाइफ भी बढ़ेगी और पटरियों पर ट्रेनों का सफर पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और सुगम हो जाएगा।
क्रिस (CRIS) को पोर्टल में बदलाव के निर्देश, तकनीक के जरिए कसा जाएगा शिकंजा
इस बड़े नीतिगत बदलाव को धरातल पर तुरंत प्रभाव से लागू करने के लिए रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (CRIS) को भी आवश्यक निर्देश भेज दिए गए हैं। क्रिस को ऑनलाइन पोर्टल में जरूरी तकनीकी बदलाव करने के लिए कहा गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बिना आरडीएसओ के प्रमाण पत्र या निरीक्षण के कोई भी संवेदनशील पुर्जा रेलवे के सिस्टम में शामिल न हो सके। डिजिटल ट्रैकिंग और मॉनिटरिंग सिस्टम के जुड़ जाने से पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी और इसमें किसी भी प्रकार की मानवीय चूक या हेरफेर की संभावना नहीं बचेगी।
रेलवे के इस कदम की देश भर के परिवहन और सुरक्षा विशेषज्ञों द्वारा सराहना की जा रही है। आम जनता और रेल यात्रियों के लिए भी यह एक बड़ी राहत भरी खबर है, क्योंकि इससे ट्रेन यात्रा के दौरान हादसों का जोखिम काफी हद तक कम हो जाएगा। रेलवे का यह कड़ा रुख यह साबित करता है कि संस्थान के लिए यात्रियों की जान और सुरक्षित सफर से बढ़कर कुछ भी नहीं है। आने वाले दिनों में इस सख्त नीति के लागू होने से पटरियों पर सुरक्षा का एक मजबूत सुरक्षा कवच तैयार होगा।







