सप्ताह की शुरुआत में शेयर बाजार धड़ाम, निवेशकों को तगड़ा झटका
भारतीय शेयर बाजार के लिए नए कारोबारी हफ्ते की शुरुआत बेहद निराशाजनक और चिंताजनक रही है। सोमवार को बाजार खुलते ही बिकवाली का ऐसा सैलाब आया कि प्रमुख सूचकांक धड़ाम हो गए। निवेशकों के चेहरे पर उस समय हवाई उड़ने लगीं जब स्क्रीन पर लाल निशान चमकने लगे और चंद मिनटों के भीतर उनकी गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा स्वाहा हो गया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख संवेदी सूचकांक सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर से भारी गोता लगाते हुए नीचे आ गया।
कारोबार की शुरुआत के साथ ही सेंसेक्स में भूचाल आ गया और यह 850 अंकों से अधिक का गोता लगाकर 73 हजार के मनोवैज्ञानिक स्तर को भी पार करते हुए नीचे फिसल गया। बाजार जानकारों के अनुसार, इतनी बड़ी गिरावट ने निवेशकों की नींद उड़ा दी है। पिछले सत्र के मुकाबले बाजार में जिस तरह की कमजोरी दिख रही थी, उसने शुरुआती घंटों में ही यह साफ कर दिया था कि आज का दिन घरेलू निवेशकों के लिए बेहद भारी गुजरने वाला है।
सेंसेक्स के अलावा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के निफ्टी का हाल भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। 50 शेयरों वाला निफ्टी इंडेक्स अपने पिछले बंद के मुकाबले नीचे खुला और देखते ही देखते 23,000 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे लुढ़क गया। बाजार के इन दोनों प्रमुख पैमानों पर मची खलबली से साफ है कि मंदी का साया एक बार फिर भारतीय वित्तीय बाजारों पर गहराता जा रहा है।
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दिग्गज शेयरों में बिकवाली का भारी दबाव, सभी सेक्टर लाल निशान में
शेयर बाजार में मचे इस कोहराम का असर हर सेक्टर पर साफ तौर पर दिखाई दिया। बीएसई की लार्जकैप कैटेगरी में शामिल तमाम दिग्गज कंपनियों के शेयर ताश के पत्तों की तरह बिखरते नजर आए। स्थिति यह थी कि इस कैटेगरी के सभी प्रमुख शेयर लाल निशान के दायरे में ही कारोबार करने को मजबूर थे। बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, ऑटो और आईटी जैसे तमाम मजबूत सेक्टरों में बिकवाली का भयंकर दबाव देखा गया।
खास तौर पर बैंकिंग शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसके चलते बीएसई बैंकेक्स में भी बड़ी कमजोरी आई। एचडीएफसी बैंक, कोटक बैंक, एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे बाजार के दिग्गजों के शेयरों में एक से दो फीसदी तक की जोरदार गिरावट दर्ज की गई। जानकारों का कहना है कि जब बाजार के इतने बड़े और मजबूत शेयर बिकवाली के दबाव में आते हैं, तो पूरे बाजार का मनोबल डगमगा जाता है।
आईटी शेयरों की चाल भी सुस्त रही और आईटी इंडेक्स में भी निवेशकों को निराशा हाथ लगी। बाजार के जानकारों का मानना है कि इस तरह की चौतरफा बिकवाली से छोटे और मध्यम निवेशकों का भरोसा अस्थायी तौर पर डगमगाता है। बाजार की इस भयंकर मंदी के चलते कुल मार्केट कैप में भी भारी कमी दर्ज की गई है, जिससे निवेशकों की संपत्ति में बड़ी सेंध लगी है।
निवेशकों की गाढ़ी कमाई डूबी, चंद मिनटों में लाखों करोड़ का नुकसान
शेयर बाजार में आई इस अचानक आंधी की वजह से देश भर के निवेशकों की करोड़ों-अरबों की पूंजी पानी में मिल गई। विभिन्न वित्तीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाजार खुलते ही कुछ ही पलों के भीतर निवेशकों के 6 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा स्वाहा हो गए। इस तरह की भारी-भरकम संपत्ति का नुकसान होना किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका होता है।
रिटेल निवेशकों से लेकर बड़े संस्थागत निवेशकों तक, हर कोई इस बात से चिंतित नजर आया कि सप्ताह के पहले ही दिन बाजार इस तरह क्यों धड़ाम हो गया। कई जानकारों का यह भी कहना है कि बाजार के इस अनिश्चित माहौल में घबराहट में आकर फैसले लेने से बचना चाहिए। हालांकि, नुकसान का यह आंकड़ा निवेशकों के लिए एक बड़ी चेतावनी की तरह है कि शेयर बाजार में जोखिम हमेशा बना रहता है।
"बाजार में इस तरह की तेज गिरावट निवेशकों के लिए सतर्क होने का संकेत है। वैश्विक परिस्थितियों और विदेशी फंड्स की गतिविधियों पर पैनी नजर रखना इस समय सबसे जरूरी है, ताकि जोखिम को कम किया जा सके।" — वित्तीय बाजार विशेषज्ञ
ग्लोबल मार्केट के संकेत और कच्चे तेल की कीमतों में उबाल
भारतीय शेयर बाजार में मची इस तबाही के पीछे मुख्य वजहें घरेलू नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मोर्चे से जुड़ी हुई हैं। जानकारों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव और शांति वार्ता में आ रहे गतिरोध ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा ईरानी प्रस्ताव को खारिज किए जाने के बाद कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में एक बार फिर आग लग गई है।
कच्चे तेल की कीमतें उछलकर 106 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं। भारत जैसे देशों के लिए, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करते हैं, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें मुद्रास्फीति और राजकोषीय घाटे को बढ़ाने का काम करती हैं। यही कारण है कि जैसे ही क्रूड आयल महंगा होता है, भारतीय शेयर बाजारों में उसका तुरंत नकारात्मक असर दिखाई देने लगता है।
इसके अतिरिक्त, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का रवैया भी भारतीय बाजार के प्रति उदासीन बना हुआ है। बीते सत्रों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों से भारी मात्रा में पैसा निकाला है और ताबड़तोड़ बिकवाली की है। जब विदेशी निवेशक बड़े पैमाने पर पूंजी निकालते हैं, तो घरेलू बाजार के लिए संभलना मुश्किल हो जाता है।
आगे क्या करें निवेशक? विशेषज्ञों की सलाह
इस तरह के उठापटक वाले बाजार में आम निवेशकों के मन में यह सवाल जरूर आता है कि अब उन्हें क्या करना चाहिए। वित्तीय विशेषज्ञों का स्पष्ट रूप से यह सुझाव है कि बाजार की इस अस्थिरता को देखकर पैनिक यानी घबराहट में आकर अपने शेयरों को औने-पौने दामों पर बिल्कुल न बेचें। शेयर बाजार हमेशा उतार-चढ़ाव का खेल रहा है और लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करने वालों को ऐसे समय में धैर्य बनाए रखना चाहिए।
विशेष सलाह देते हुए एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी भी नए निवेश से पहले अच्छी कंपनियों के फंडामेंटल्स की जांच जरूर कर लें और अपनी जोखिम लेने की क्षमता के हिसाब से ही पोर्टफोलियो तैयार करें। बाजार की हर बड़ी गिरावट एक अवसर भी हो सकती है यदि सही और मजबूत शेयरों में समझदारी के साथ निवेश किया जाए।
कुल मिलाकर, सोमवार को हुई इस जबरदस्ति गिरावट ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वैश्विक उथल-पुथल भारतीय शेयर बाजारों को पलभर में हिला सकती है। निवेशकों को आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय खबरों और आर्थिक आंकड़ों पर अपनी नजर बनाए रखनी होगी ताकि वे सही समय पर सही वित्तीय निर्णय ले सकें।








