पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव की सरगर्मी अभी से तेज हो गई है। राज्य में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बीच संभावित गठजोड़ की चर्चाओं के बीच पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दोनों दलों पर जमकर निशाना साधा है। एक मीडिया कार्यक्रम 'पंचायत आजतक पंजाब' के दौरान सीएम मान ने दोनों पार्टियों के रिश्तों की तुलना एक दिलचस्प कहानी के जरिए की और इसे राजनीतिक रूप से घातक बताया।
कछुए और चूहे की कहानी से साधा निशाना
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अकाली दल और बीजेपी के रिश्तों पर चुटकी लेते हुए कहा कि इन दोनों दलों की दोस्ती बिल्कुल कछुए और चूहे जैसी है। उन्होंने किस्सा सुनाते हुए कहा कि एक बार एक कछुए और चूहे ने साथ रहने के लिए अपनी पूंछ आपस में बांध ली थी। जब कछुए को गर्मी लगी तो वह गहरे पानी में उतर गया, जिससे चूहा डूबकर मर गया। इसके बाद जब कछुआ बाहर आया, तो एक चील मरे हुए चूहे को उठाकर उड़ गई और उससे बंधा कछुआ भी हवा में उठ गया, जो सौ-दो सौ मीटर की ऊंचाई से नीचे गिरकर मारा गया।
इस कहानी के माध्यम से सीएम मान ने तंज कसते हुए कहा कि अब बीजेपी और अकाली दल खुद ही तय कर लें कि इनमें से कौन कछुआ है और कौन चूहा। उनका यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
'हम आलोचना करके नहीं, काम के आधार पर मांगेंगे वोट'
शिरोमणि अकाली दल और अन्य विपक्षी दलों पर हमला बोलते हुए भगवंत मान ने स्पष्ट किया कि आम आदमी पार्टी (AAP) आगामी विधानसभा चुनाव में किसी दूसरे दल की आलोचना या मानहानि के आधार पर वोट नहीं मांगेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी पूरी तरह से अपने विकास कार्यों और जनता के हित में उठाए गए कदमों के दम पर जनता के बीच जाएगी।
मान ने अपनी सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए बिजली, सिंचाई, स्वास्थ्य, सरकारी नौकरियों और शिक्षा के क्षेत्र में किए गए ऐतिहासिक कामों को चुनावी मुद्दा बताया। उन्होंने दावा किया कि राज्य में करीब 14 हजार किलोमीटर नहरी पाइपलाइन बिछाई गई है, जिससे खेतों तक आसानी से पानी पहुंच रहा है। इसके अलावा आम आदमी क्लिनिक और स्वास्थ्य बीमा योजना का भी उन्होंने विशेष रूप से जिक्र किया।
दिल्ली मॉडल नहीं, अब 'पंजाब मॉडल' की बात
पिछले चुनावों में 'दिल्ली मॉडल' के प्रचार और अब दिल्ली में पार्टी की स्थिति को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अब पंजाब के पास खुद का मजबूत 'पंजाब मॉडल' है। उन्होंने सरकारी स्कूलों में आए बड़े बदलाव का उदाहरण देते हुए बताया कि साल 2021 में पंजाब के सरकारी स्कूलों से करीब 80 बच्चों ने NEET की परीक्षा पास की थी, जबकि अब यह संख्या बढ़कर लगभग 800 तक पहुंच गई है। उन्होंने स्मार्ट क्लासरूम, आधुनिक प्रयोगशालाओं और शिक्षकों की विदेशों में ट्रेनिंग का भी हवाला दिया।
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