देश की राजधानी दिल्ली और उससे सटे इलाकों में जहरीली होती हवा से राहत पाने के लिए हरियाणा सरकार ने एक बेहद सख्त और बड़ा फैसला लिया है। राज्य में वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने तय किया है कि अब पुरानी और प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों की नो-एंट्री के साथ-साथ उन्हें पेट्रोल पंपों पर ईंधन भी नहीं दिया जाएगा। इस नए नियम के लागू होने के बाद उन वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं जो नियमों को ताक पर रखकर पुरानी गाड़ियां सड़कों पर दौड़ा रहे हैं।
एनसीआर के इन चार जिलों में लागू होगा नया नियम
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग यानी CAQM के निर्देशों का पालन करते हुए हरियाणा सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानी NCR में आने वाले प्रमुख जिलों में इस नियम को सबसे पहले उतारने का फैसला किया है। पहले चरण के तहत यह सख्त व्यवस्था गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और झज्जर जिलों में लागू की जा रही है। इन इलाकों में हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रशासन अब पूरी तरह से एक्शन मोड में नजर आ रहा है।
सरकार का साफ कहना है कि जो गाड़ियां पर्यावरण के तय मानकों पर खरी नहीं उतरती हैं या अपनी तय उम्र पूरी कर चुकी हैं, उन्हें सड़क पर चलने से रोकना बेहद जरूरी हो गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है और इसके तकनीकी पहलुओं पर काम भी शुरू हो गया है। अधिकारियों का मानना है कि जब गाड़ियों को ईंधन ही नहीं मिलेगा, तो वे अपने आप सड़कों से गायब हो जाएंगी।
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पेट्रोल पंपों पर लगेंगे हाई-टेक कैमरे
इस नियम को पूरी सख्ती से लागू करने के लिए हरियाणा परिवहन विभाग ने एक मजबूत तकनीकी योजना तैयार की है। इसके तहत एनसीआर के चारों जिलों के सभी पेट्रोल पंपों पर ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकग्निशन यानी ANPR कैमरे लगाए जाएंगे। शुरुआती चरण में करीब 775 कैमरे लगाने की योजना है, जिस पर सरकार लगभग 41.74 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है।
जैसे ही कोई गाड़ी पेट्रोल पंप पर पहुंचेगी, ये कैमरे उसकी नंबर प्लेट को तुरंत स्कैन कर लेंगे। अगर गाड़ी 'एंड-ऑफ-लाइफ व्हीकल' यानी अपनी मियाद पूरी कर चुकी श्रेणी में पाई जाती है, तो सिस्टम पंप मालिक या कर्मचारी को तुरंत अलर्ट भेज देगा। इसके बाद पेट्रोल पंप पर किसी भी पुरानी गाड़ी को एक लीटर भी पेट्रोल या डीजल नहीं बेचा जाएगा।
कौन सी गाड़ियां आएंगी इस दायरे में?
यह नियम मुख्य रूप से उन गाड़ियों पर शिकंजा कसेगा जो नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के मुताबिक अपनी उम्र पूरी कर चुकी हैं। नियमों के मुताबिक, आमतौर पर 15 साल से पुरानी पेट्रोल और 10 साल से पुरानी डीजल गाड़ियों को इस कैटेगरी में रखा गया है। 1 अक्टूबर से इन गाड़ियों का सड़कों पर चलना लगभग असंभव हो जाएगा क्योंकि ईंधन न मिलने के कारण इन्हें चलाना किसी चुनौती से कम नहीं होगा।
"प्रदूषण के खिलाफ हमारी लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर है। एनसीआर में साफ हवा सुनिश्चित करने के लिए पुरानी गाड़ियों पर यह पाबंदी जरूरी थी, और इसे सख्ती से लागू किया जाएगा।" — नायब सिंह सैनी, मुख्यमंत्री, हरियाणा
पूरे राज्य में चरणबद्ध तरीके से बढ़ेगा दायरा
फिलहाल इस योजना की शुरुआत एनसीआर के चार जिलों से हो रही है, लेकिन सरकार की योजना इसे पूरे हरियाणा में फैलाने की है। शुरुआती चरण के बाद पूरे राज्य में लगभग 2,780 एएनपीआर कैमरे लगाने का अनुमान लगाया गया है, ताकि पूरे प्रदेश में प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों पर नजर रखी जा सके। सरकार के इस कदम से आम जनता को साफ हवा मिलने की उम्मीद जग गई है, वहीं वाहन चालकों को अब अपनी पुरानी गाड़ियां बदलने के बारे में सोचना होगा।



