झारखंड राज्य से क्षय रोग यानी टीबी को पूरी तरह खत्म करने के लिए अब देश के युवाओं और अनुशासित एनसीसी कैडेट्स की बड़ी फौज मैदान में उतरने जा रही है। स्वास्थ्य विभाग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) ने टीबी मुक्त झारखंड के संकल्प को जमीन पर उतारने के लिए एनसीसी (National Cadet Corps) के साथ एक महत्वपूर्ण साझेदारी की है। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य राज्य के दूर-दराज के गांवों और कस्बा इलाकों तक टीबी जागरूकता का संदेश पहुंचाना और इस गंभीर बीमारी से ग्रस्त मरीजों को समय पर सही इलाज मुहैया कराना है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और एनसीसी की संयुक्त रणनीति
राजधानी रांची में आयोजित एक उच्चस्तरीय समन्वय बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि झारखंड को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में एनसीसी कैडेट्स की युवा ऊर्जा और उनकी पहुंच का भरपूर इस्तेमाल किया जाए। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने इस पहल की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि टीबी जैसी बीमारी से निपटने के लिए केवल चिकित्सीय उपाय ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि सामाजिक स्तर पर जन-जागृति लाना भी उतना ही आवश्यक है।
शशि प्रकाश झा ने अपने संबोधन में कहा कि टीबी के संक्रमण से खुद को सुरक्षित रखने के लिए शारीरिक दूरी या एहतियात बरतना जरूरी है, लेकिन इस बीमारी को समाज से पूरी तरह मिटाने के लिए मरीजों के मन के करीब आना होगा। इसका मतलब यह है कि मरीजों के साथ किसी भी प्रकार का सामाजिक भेदभाव न हो और उन्हें यह अहसास कराया जाए कि वे इस जंग में अकेले नहीं हैं। एनसीसी कैडेट्स अपने सेवा भाव और अनुशासन के जरिए इस सामाजिक कलंक को मिटाने में सबसे बड़ी भूमिका निभा सकते हैं, क्योंकि उनकी जड़ें समाज के हर वर्ग तक फैली हुई हैं।
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गांव और प्रखंड स्तर तक पहुंचेगी टीबी के खिलाफ मुहिम
झारखंड के कई ग्रामीण और आदिवासी बहुल इलाकों में आज भी स्वास्थ्य संबंधी कई भ्रांतियां और जानकारियां का अभाव पाया जाता है। कई बार लोग शुरुआती लक्षणों को सामान्य खांसी या सर्दी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो बाद में खतरनाक टीबी का रूप ले लेता है। एनसीसी की सबसे बड़ी ताकत उसकी व्यापक पहुंच है। एनसीसी के कैडेट्स न केवल बड़े शहरों और स्कूलों-कॉलेजों तक सीमित हैं, बल्कि वे राज्य के छोटे-छोटे गांवों, प्रखंडों और दूरदराज के अंचलों तक अपनी पहुंच रखते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब युवा कैडेट्स घर-घर जाकर लोगों को टीबी के लक्षणों, जांच की सुविधाओं और सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली मुफ्त दवाओं की जानकारी देंगे, तो इसका असर बहुत गहरा होगा। ग्रामीण इलाकों में युवा स्वयंसेवकों की बात लोग अधिक आसानी से सुनते और समझते हैं। यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग ने एनसीसी के नेटवर्क को इस राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की रीढ़ के रूप में उपयोग करने का निर्णय लिया है।
"टीबी मुक्त झारखंड के निर्माण में हमारे एनसीसी कैडेट्स बहुमूल्य योगदान दे सकते हैं। टीबी मिटाने के लिए केवल दवा नहीं, बल्कि मरीज के मन के करीब आना और समाज में जागरूकता फैलाना जरूरी है, जिसमें एनसीसी की पहुंच जिला, प्रखंड और गांव स्तर तक होने से बहुत मदद मिलेगी।" — शशि प्रकाश झा, अभियान निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड
रांची डिवीजन के अधिकारियों ने साझा की कार्ययोजना
एनसीसी मुख्यालय, रांची के अधिकारियों ने भी इस अभियान को लेकर अपनी पूरी प्रतिबद्धता जताई है। एनसीसी के कर्नल रोहित ने बैठक के दौरान कहा कि झारखंड के सभी कैडेट्स टीबी मुक्त भारत अभियान में अपना शत-प्रतिशत सहयोग देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व में भी एनसीसी कैडेट्स द्वारा कई मौकों पर टीबी उन्मूलन को लेकर जागरूकता रैलियां और नुक्कड़ नाटक आयोजित किए जा चुके हैं, जिन्हें आम जनता का भरपूर समर्थन मिला था।
कर्नल रोहित ने यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम और एनसीसी कैडेट्स के बीच बेहतर आपसी तालमेल और समन्वय स्थापित कर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि सही दिशा में सुनियोजित तरीके से प्रयास किए जाएं, तो झारखंड से टीबी के मामलों में भारी कमी लाई जा सकती है।
प्रेजेंटेशन के जरिए समझे गए पिछले प्रयास और भविष्य की राह
बैठक के दौरान एनसीसी के कर्नल अनुराग सिंह ने एक विस्तृत प्रेजेंटेशन के माध्यम से रांची डिवीजन द्वारा टीबी उन्मूलन के क्षेत्र में अब तक किए गए कार्यों की पूरी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि किस प्रकार पिछले अभियानों में कैडेट्स ने स्कूल के बच्चों और स्थानीय नागरिकों को जोड़कर एक मजबूत श्रृंखला तैयार की थी। प्रेजेंटेशन में यह भी रेखांकित किया गया कि किन क्षेत्रों में अभी और अधिक मेहनत करने की आवश्यकता है।
प्रेजेंटेशन के जरिए यह भी स्पष्ट किया गया कि आने वाले दिनों में कैडेट्स किस प्रकार घर-घर जाकर संपर्क अभियान चलाएंगे और संशय की स्थिति में लोगों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र तक जाने के लिए प्रेरित करेंगे। स्वास्थ्य विभाग और एनसीसी के इस संयुक्त प्रयास से झारखंड में टीबी के खिलाफ चल रही जंग को एक नई गति मिलने की पूरी उम्मीद है।
निष्कर्ष और आगे की योजना
झारखंड सरकार और स्वास्थ्य विभाग का यह कदम राज्य को स्वास्थ्य के मोर्चे पर आत्मनिर्भर और रोगमुक्त बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। जब तक समाज का हर नागरिक, युवा और छात्र इस प्रकार के अभियानों से नहीं जुड़ेगा, तब तक किसी भी बीमारी को जड़ से खत्म करना संभव नहीं है। एनसीसी कैडेट्स के जुड़ने से अब यह सिर्फ सरकारी कार्यक्रम नहीं रह गया है, बल्कि एक बड़ा सामाजिक जनआंदोलन बनता जा रहा है। आने वाले हफ्तों में राज्य भर में विशेष जागरूकता शिविरों और अभियानों की शुरुआत की जाएगी, जिससे टीबी के खिलाफ लड़ाई को निर्णायक मोड़ मिल सके।




