देशभर में बिल्ली प्रजाति के दुर्लभ और विलुप्तप्राय जीव 'एशियाटिक कैराकल' को लेकर एक बेहद सुखद और उत्साहजनक खबर सामने आई है। राजस्थान के एक प्रमुख टाइगर रिजर्व के जंगलों में कैराकल की देश में सबसे ज्यादा आबादी पाई गई है। जंगल में लगाए गए विशेष ट्रैप कैमरों में करीब 200 कैराकल रिकॉर्ड किए गए हैं। देश के 96 प्रतिशत हिस्से से लगभग विलुप्त हो चुके इस दुर्लभ जीव का इस संख्या में मिलना वन्यजीव प्रेमियों और वन विभाग के लिए एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।
फुर्तीला, शर्मीला और दिन में भी आ रहा नजर
कैराकल बिल्ली प्रजाति का एक बेहद फुर्तीला और शर्मीला जंगली जानवर है। यह आमतौर पर इंसानों की बस्तियों से दूर रहता है और ज्यादातर रात के वक्त ही शिकार की तलाश में निकलता है। हालांकि, इन जंगलों में इसकी संख्या अच्छी होने के चलते यह अब दिन के समय भी कैमरा ट्रैप में आसानी से नजर आ रहा है। वन विभाग इसे इस इलाके में कैराकल के लिए अनुकूल और बेहतरीन माहौल का स्पष्ट संकेत मान रहा है।
हाल ही में कैराकल के संरक्षण को लेकर वन विभाग और टाइगर रिजर्व प्रशासन की ओर से एक विशेष सेमिनार का भी आयोजन किया गया था। इस दौरान वन्यजीव विशेषज्ञों ने वन कर्मियों और प्रकृति प्रेमियों को इस दुर्लभ जीव की आदतों और इसके ऐतिहासिक वितरण क्षेत्र के बारे में विस्तृत जानकारी दी। विशेषज्ञों के अनुसार, आजादी से पहले यह जानवर एक बहुत बड़े भू-भाग पर पाया जाता था, लेकिन समय के साथ इसके प्राकृतिक आवास लगातार सिकुड़ते चले गए।
हवा में उड़ते पक्षियों को भी दबोचने की गजब कला
कैराकल देखने में छोटी जंगली बिल्ली और तेंदुए के बीच की एक अद्भुत कड़ी जैसा प्रतीत होता है। यह अपनी अविश्वसनीय तेजी और फुर्ती के लिए जाना जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह झाड़ियों में चुपचाप छिपकर अचानक पक्षियों पर जोरदार झपट्टा मारता है। कई बार यह अपनी असाधारण छलांग के बल पर हवा में उड़ते पक्षियों को भी आसमान में ही दबोच लेता है। इसके अलावा, खरगोश और अन्य छोटे जीव भी इसका मुख्य भोजन हैं।
यह वन्यजीव आमतौर पर अकेले रहना पसंद करता है और अपना एक निश्चित इलाका तय करता है। नर और मादा ज्यादातर समय अलग-अलग रहते हैं और केवल प्रजनन के मौसम में ही साथ आते हैं। मादा कैराकल ही अपने बच्चों की पूरी देखभाल करती है और उनके बड़े होने तक साये की तरह उनके साथ रहती है। वन विभाग ने इस दुर्लभ प्रजाति की सुरक्षा के लिए जंगलों में गश्त और निगरानी और अधिक कड़ी कर दी है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल इस वीडियो और रिपोर्ट्स के दावों की सत्यता की 'The Freelance' स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है। यह विषय वन्यजीव संरक्षण के बीच व्यापक चर्चा का केंद्र बना हुआ है। वीडियो साभार: संबंधित सोशल मीडिया हैंडल / क्रिएटर / वन विभाग।









