रूसी सेना के भीतर बड़ा विश्वासघात
रूस और यूक्रेन के बीच जारी भीषण युद्ध के बीच एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। रूसी सेना के भीतर ही देश की सुरक्षा के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ किया गया है। सेना के एक युवा लेफ्टिनेंट ने अपने ही देश की पीठ में छुरा घोंपते हुए दुश्मन देश को गुप्त जानकारियां मुहैया कराईं। इस सनसनीखेज खुलासे ने मॉस्को से लेकर अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा गलियारों तक में हलचल मचा दी है।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 26 साल के रूसी मिलिट्री अफसर लेफ्टिनेंट लेव स्तुपनिकोव ने अपने पद और पहुंच का दुरुपयोग किया। उसने यूक्रेन की खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर काम किया और अपनी ही बटालियन की हर चाल की खबर दुश्मन तक पहुंचाई। इस आंतरिक गद्दारी की कीमत सैकड़ों रूसी सैनिकों को अपनी जान गंवाकर चुकानी पड़ी।
युद्ध के मैदान में इस तरह की भीतरघात की घटनाएं बेहद दुर्लभ मानी जाती हैं। एक सैन्य अधिकारी का इस तरह से अपने ही साथियों के खिलाफ खड़े हो जाना रूसी सैन्य नेतृत्व के लिए भी एक बड़ा झटका है। इस मामले के सामने आने के बाद रूस की खुफिया व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा पर कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
कैसे लीक होती थी युद्ध की गोपनीय योजनाएं
लेफ्टिनेंट लेव स्तुपनिकोव बुड्योनी मिलिट्री अकादमी का छात्र रहा था। पढ़ाई पूरी करने के बाद उसे रूसी सेना में कम्यूनिकेशन अधिकारी के तौर पर तैनात किया गया था। उसकी जिम्मेदारी यूक्रेन के डोनबास इलाके में वुहलेदार पर कब्जा करने वाले अभियान के दौरान सैन्य कमांडरों और उनकी टुकड़ियों के बीच संपर्क बनाए रखना था।
अपनी इस खास जिम्मेदारी के कारण स्तुपनिकोव के पास सेना की गतिविधियों, निगरानी ड्रोनों और सुरक्षा कैमरों से मिलने वाले डेटा तक सीधी पहुंच थी। उसे पता रहता था कि कौन सी टुकड़ी किस समय कहां तैनात है और आगे क्या रणनीति बनाई जा रही है। इसी का फायदा उठाकर उसने रूसी सैनिकों की पल-पल की खबर यूक्रेनी खुफिया नेटवर्क को भेजनी शुरू कर दी।
दुश्मन को यह जानकारी मिलने के बाद यूक्रेनी सेना ने बेहद सटीक हमले किए। रूसी सैनिकों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और वे लगातार इन हमलों का शिकार बनते चले गए। स्तुपनिकोव की इस हरकत ने रूसी सेना को अंदर से खोखला कर दिया था।
कर्नल समेत दर्जनों सैनिकों की मौत का सच
इस जासूसी और गद्दारी का सबसे भयानक परिणाम पूर्वी यूक्रेन में देखने को मिला। कड़ाके की ठंड के दौरान स्तुपनिकोव ने पेट में दर्द होने का नाटक किया और अपने साथियों से दूर चला गया। उसके वहां से हटते ही यूक्रेनी मिसाइलों ने उस ठिकाने पर ताबड़तोड़ हमले कर दिए।
इस सुनियोजित हमले में कर्नल गुसैन मुसायेव समेत 68 रूसी सैनिकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 60 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। कर्नल मुसायेव यूक्रेनी सेना के मुख्य निशानों में से एक थे। हमले के बाद जब यूक्रेनी संपर्क ने स्तुपनिकोव से विस्फोट के बाद की स्थिति पूछी, तो उसने बेहद ठंडे दिमाग से जवाब दिया था कि वहां अब सिर्फ लाशें पड़ी हैं।
"रूस के यूक्रेन पर सैन्य हमलों ने मेरी सोच पूरी तरह बदल दी थी। जब मैंने आसमान में रूसी हेलिकॉप्टरों को बम बरसाते देखा, तो मुझे अहसास हुआ कि आम नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है और यह सरासर गलत था।" — लेव स्तुपनिकोव, पूर्व रूसी लेफ्टिनेंट
मां के विरोध और एन्क्रिप्टेड नेटवर्क का कनेक्शन
इस अधिकारी के बागी होने के पीछे वैचारिक मतभेद भी बताए जा रहे हैं। स्तुपनिकोव की मां तातियाना यांत्सेन भी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर सरकार की मुखर आलोचक रही हैं और वे पुतिन के खिलाफ प्रदर्शनों में भी हिस्सा लेती रही हैं। परिवार की इस वैचारिक पृष्ठभूमि का असर युवा अधिकारी के मन पर भी गहरा पड़ा था।
फरवरी 2024 में स्तुपनिकोव की मां ने दिमित्रो कारपेंको से संपर्क किया। कारपेंको एक कंप्यूटर प्रोग्रामर है जो यूक्रेनी सैन्य खुफिया के साथ मिलकर काम करता है। उन्होंने रूसी सेना से गोपनीय जानकारी लीक करने वाले सैनिकों के लिए एक खास वित्तीय प्रोत्साहन और सुरक्षित नेटवर्क तैयार किया था। इसी एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए स्तुपनिकोव और यूक्रेनी खुफिया एजेंसी के बीच संपर्क पुख्ता हुआ।
अंधेरे में सीमा पार कर यूक्रेन पहुंचने की कहानी
जुलाई 2024 की एक रात स्तुपनिकोव ने अपनी यूनिट से चुपचाप निकलने का फैसला किया। वह अंधेरे का फायदा उठाते हुए रूसी सैन्य टुकड़ी से अलग हुआ और यूक्रेनी ठिकानों की ओर बढ़ने लगा। बंकर में बैठे यूक्रेनी सैनिक लाइव वीडियो फीड के जरिए उसकी हर एक गतिविधि पर कड़ी नजर रख रहे थे।
करीब 40 मिनट की मशक्कत के बाद वह उस जगह पर पहुंच गया जहां यूक्रेन की 72वीं ब्रिगेड तैनात थी। रूसी सैन्य वर्दी में उसे अपनी तरफ आते देख बंकर के बाहर खड़े सैनिकों ने उसे रोक लिया और तयशुदा कोडवर्ड पूछा। स्तुपनिकोव ने पहले से तय कोड 'पीनट शॉप' बोला, जिसके बाद यूक्रेनी सैनिकों ने उसे अपनी हिरासत में ले लिया।
सीमा पार करने के बाद अब यह पूर्व रूसी अधिकारी पुतिन सरकार के खिलाफ लड़ने वाले 'रूसी वॉलंटियर कोर' में शामिल हो गया है। यह संगठन उन रूसी नागरिकों का समूह है जो यूक्रेन की तरफ से युद्ध लड़ रहे हैं। इस पूरी घटना ने रूस के सैन्य तंत्र की आंतरिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और इसे युद्ध के दौरान अब तक के सबसे बड़े विश्वासघात में से एक माना जा रहा है।












