उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। सुइथाकला विकासखंड क्षेत्र के रुधौली गांव में शनिवार को एक विशेष पीडीए जनपंचायत का आयोजन किया गया, जिसमें समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने शिरकत की। इस जनपंचायत के माध्यम से विपक्षी दल ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार को घेरने की पूरी कोशिश की। कार्यक्रम के दौरान स्थानीय लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ देखने को मिली, जिसने क्षेत्रीय राजनीति में सुगबुगाहट बढ़ा दी है।
पीडीए जनपंचायत में सपा नेताओं के तीखे तेवर
रुधौली गांव स्थित गयादीन प्रजापति के आवास परिसर में आयोजित इस जनपंचायत में समाजवादी पार्टी के नेताओं ने आक्रामक रुख अपनाया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सपा के राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व राज्यमंत्री रमेश प्रजापति रहे। उन्होंने अपने संबोधन में सीधे तौर पर भाजपा सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि सरकार के पास जनता के विकास के लिए कोई ठोस योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश में सरकार केवल और केवल धर्म और संप्रदाय के नाम पर राजनीति कर रही है ताकि मूल मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाया जा सके।
सपा नेता ने आगे कहा कि आज देश का आम नागरिक तमाम तरह की परेशानियों से जूझ रहा है, लेकिन हुक्मरानों को इसकी कोई सुध नहीं है। उन्होंने मंडल आयोग और सामाजिक न्याय की वकालत करते हुए समाजवादी पार्टी के पुराने कार्यों का भी विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा से वंचितों, पिछड़ों और शोषितों की आवाज बुलंद करती आई है और आगे भी यह संघर्ष जारी रहेगा।
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महंगाई और बेरोजगारी पर सरकार को घेरा
जनपंचायत के दौरान बेरोजगारी और महंगाई का मुद्दा सबसे ऊपर रहा। मुख्य अतिथि रमेश प्रजापति ने जोर देकर कहा कि आज देश में युवा रोजगार के लिए दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन सरकार नौकरियां देने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि आज महंगाई चरम सीमा पर पहुंच चुकी है, जिससे आम आदमी की रसोई का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है। सरकार को इन गंभीर मुद्दों पर जनता को जवाब देना चाहिए, लेकिन सरकार इन सवालों से लगातार किनारा कर रही है।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि और पूर्व विधायक शैलेंद्र यादव ललई ने भी इस दौरान तीखा हमला बोला। उन्होंने महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के मुद्दों को उठाते हुए कहा कि प्रदेश में आम जनता त्रस्त हो चुकी है। सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार चरम पर है और आम आदमी की सुनवाई कहीं नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि जनता अब सब कुछ समझ चुकी है और आने वाले समय में इसका करारा जवाब देगी।
"भाजपा सरकार धर्म और संप्रदाय के नाम पर समाज को बांटने की राजनीति कर रही है। महंगाई, बेरोजगारी और जनहित के बुनियादी मुद्दों पर सरकार पूरी तरह विफल हो चुकी है और जनता अब बदलाव चाहती है।" — रमेश प्रजापति, राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व राज्यमंत्री, सपा
कानून-व्यवस्था और पेपर लीक के मामलों पर तंज
सपा जिलाध्यक्ष राकेश मौर्य ने भी जनपंचायत को संबोधित करते हुए कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कानून का राज केवल कागजों तक सीमित रह गया है और आए दिन आपराधिक घटनाएं आम आदमी की सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशान लगा रही हैं। उन्होंने हाल के दिनों में सामने आए पेपर लीक मामलों का हवाला देते हुए कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
राकेश मौर्य ने आरक्षण के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा और आरोप कहा कि संवैधानिक संस्थाओं के जरिए आरक्षण को कमजोर करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिसे समाजवादी पार्टी कभी सफल नहीं होने देगी। सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता के अभाव पर भी सवाल उठाए गए और कहा गया कि युवाओं को उनका हक दिलाने के लिए पार्टी सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करने को तैयार है।
स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं की रही भारी मौजूदगी
इस पीडीए जनपंचायत में जौनपुर जिले के तमाम दिग्गज समाजवादी नेता और स्थानीय कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम की सफलता सुनिश्चित करने में विधानसभा अध्यक्ष मिथिलेश यादव की अहम भूमिका रही। इस दौरान शशिकांत प्रजापति, नरेंद्र कुमार प्रजापति, डॉ. शैल कुमार, बाबूराम, रामनाथ, हरिश्चंद्र प्रजापति, संतोष यादव पिंटू, प्रेम यादव, हरिराम, राममिलन, भूपेंद्र यादव और दिनेश यादव समेत क्षेत्र के सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
निष्कर्ष और राजनीतिक मायने
जौनपुर में आयोजित यह पीडीए जनपंचायत आगामी राजनीतिक रणनीतियों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। समाजवादी पार्टी लगातार पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फार्मूले के जरिए जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी है। महंगाई, बेरोजगारी और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों को उठाकर सपा एक बार फिर जमीनी स्तर पर अपनी राजनीतिक जमीन को उर्वर करने का प्रयास कर रही है। देखना यह होगा कि विपक्षी दलों के इन हमलों का राजनीतिक गलियारों में क्या असर देखने को मिलता है।




